O. P. Jha
Thursday, 5 November 2015
रुबाई
बहैत धार हमर जिनगी आ कछेर अहाँ
सुनबै छी जिनगीक तान बेर बेर अहाँ
आँखि मूनल रहै वा फूजले रहै हमर
हमर सपनामे कएने छी घरेर अहाँ
रुबाई
कहियो तँ करेजासँ हमरा सटा क' देखियौ
हमर नैनासँ अपन नैना मिला क' देखियौ
बनि जेतै एकटा इतिहासे अमर प्रेमक
हमर प्रेमकेँ करेजामे ढुका क' देखियौ
रुबाई
विरहक हमर उपचार नै, अहाँ बिनु जीबि लए छी कहुना
देखलक कियो नै फाटल करेज, जकरा सीबि लए छी कहुना
सुखाएल नयनक ई घाट देखि लोक बूझै निसोख हमरा
कियो नै बूझै नोरक धार नयनसँ हम पीबि लए छी कहुना
गजल
हमर करेजक जान तिरंगा
भारत-भूमिक शान तिरंगा
शोषित लोकक आस बनल छै
आमजनक अरमान तिरंगा
नजरि उठेतै दुश्मन जखने
बनत हमर ई बाण तिरंगा
मोल मनुक्खक होइत की छै
गाबि कहै छै गान तिरंगा
राम-रहीमक बातसँ आगू
"ओम"क अछि सम्मान तिरंगा
मात्राक्रम दीर्घ-ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ दू बेर प्रत्येक पाँतिमे।
कविता
राति कारी बीत चुकल, भेल जगतमे उज्जर बिहान।
सूतबै कतेक काल धरि, आब जागि जाउ अहाँ श्रीमान।
चिड़ै चुनमुन नीड़सँ निकसल, गाबि रहल अछि मंगलगान।
लागि रहल अछि सगरो जगतमे आबि गेल जेना नब प्राण।
रंग रंग केर फूल फुलाएल, बढ़ि गेल फुलवारीक शान।
नब प्रकाशसँ दमकै धरनी, सब दिस इजोतक छै गुणगान।
चलू उठू आइ करू प्रतिज्ञा राखब हम मिथिलाक मान।
देशक विकासक संग चलब हम, भारतक माथक छी हम चान।
रुबाई
चानक चमक बढ़ि गेल अछि
मोनक धमक बढ़ि गेल अछि
जहिया सँ हुनकर रूप देखल
गामक गमक बढ़ि गेल अछि
ओम प्रकाश
रुबाई
राति बीतल जाइए
मोन तीतल जाइए
हारि बैसल छी हिया
प्रेम जीतल जाइए
ओम प्रकाश
गजल
मोन वैह गलती बेर बेर करैए
चान केर चाहत आब फेर करैए
पूरलै कहाँ पहिलुक सबेरक सपना
आस नब किए एखनहुँ ढेर करैए
जीबि रहल मारल मोन भूमि धएने
सदिखने तँ ई जिनगी अन्हेर करैए
भाँग पीबि सनकल नाचि रहल मनुख ई
सनकि सनकि कोना ई घरेर करैए
मोन भरि छलै गप ओम केर हिया मे
ओहिना तँ नै गप सेर सेर करैए
ओम प्रकाश
गजल
हमर बात कियो बुझलक कहाँ
हमर मोन कियो तकलक कहाँ
चमकि गेल छलै बिजुरी कतौ
हमर अन्हार कियो हरलक कहाँ
बात सुनल सभक नमहर सदति
हमर छोट कियो सुनलक कहाँ
राखि हाथ मे बम आ पिस्तौल
हमर नाच कियो नचलक कहाँ
ओम जपि हरक नाम सदिखन
हमर नाम कियो जपलक कहाँँ
गजल
आब हम बहुत सुधरि गेल छी
कष्ट तँ अनकर बिसरि गेल छी
की समाज आ की सामाजिकता
ऐ सँ कहिये सँ ससरि गेल छी
कखन चमकतेै मेघ गगन मे
रातिये सँ हम उमरि गेल छी
जूनि चिकरबै सभक हाल पर
मारि खा क' सब कुहरि गेल छी
ओम निखरलै चुपे रहि बैसले
सब कियो अहूँ निखरि गेल छी
Friday, 14 November 2014
गजल
अपन मोनक कहल मारि बैसल छी
छलै खिस्सा लिखल फाडि बैसल छी
हँसी हुनकर हमर मोनमे गाडल
करेजा अपन हम हारि बैसल छी
पढू भाषा नजरि बाजि रहलै जे
किए हमरा अहाँ बारि बैसल छी
सिनेहक बूझलौं मोल नै कहियो
अहाँ गर्दा जकाँ झारि बैसल छी
जमाना कहल मानैत छी सदिखन
कहल "ओम"क अहाँ टारि बैसल छी
- ओम प्रकाश
मफाईलुन-फऊलुन-मफाईलुन (प्रत्येक पाँतिमे एक बेर)
गजल
कानैत आँखिक आगिमे जरल आकाशक शान छै
बेथा करेजक लहकि गेलै
,
सभक झरकल मान छै
बैसल रहै छी प्रभुक दरबारमे न्यायक आसमे
हम बूझलौं नै बात
,
भगवान ऐ नगरक आन छै
सदिखन रहैए मगन अपने बुनल ऐ संसारमे
चमकैत मोनक गगनमे जे विचारक ई चान छै
आसक दुआरिक माटि कोडैत रहलौं आठो पहर
सुनगैत मोनक साज पर नेहमे गुंजित गान छै
सूखल मुँहक खेती सगर की कहू धरती मौन छै
मुस्की सभक ठोरक रहै यैह "ओम"क अभिमान छै
- ओम प्रकाश
दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ
,
दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ
,
दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ
,
दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ
,
मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन-मुस्तफइलुन (प्रत्येक पाँतिमे एक बेर)
Friday, 7 March 2014
गजल
हमरा अहाँमे जे मेल छल
ओ ओहिना कोनो खेल छल
बान्हल सिनेहक हम डोरि जे
हुनका किया लागल जेल छल
पिछरल हमर डेगक की कहू
पघिलल करेजक से तेल छल
ककरो कियो किछु सुनलक कहाँ
एहन मचल रेलमपेल छल
"ओम"क करेजा सदिखन कहल
मुस्की हुनक हमरे लेल छल
(दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ, दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व, दीर्घ)- प्रत्येक पाँतिमे एक बेर
Thursday, 6 February 2014
गजल
राम जपैत छी रहम करू
कृष्ण सुमरि अहाँ करम करू
कष्ट अनकर बूझिकऽ सदिखन
धन्य कनी अपन जनम करू
कानि रहल बहिन-माय अपन
अंतरमे कनी शरम करू
पजरत आगि ठंढा हियमे
अपन विचारकेँ गरम करू
"ओम"क बात राजा सुनि लिअ
राजक आब किछु धरम करू
दीर्घ, ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ(मुतफाइलुन), दीर्घ, ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ
२-११२१२-२-११२ (प्रत्येक पाँतिमे एक बेर)
Friday, 31 January 2014
गजल
हेतै खतम गुटबाज बेबस्था
बनतै सभक आवाज बेबस्था
भेलै बहुत चीरहरणक खेला
राखत निर्बलक लाज बेबस्था
देसक आँखिमे नोर नै रहतै
सजतै माथ बनि ताज बेबस्था
मिलतै सभक सुर ताल यौ ऐठाँ
एहन बनत ई साज बेबस्था
"ओम"क मोन कहि रहल छै सबकेँ
करतै आब किछु काज बेबस्था
दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-लघु
,
दीर्घ-दीर्घ-लघु-दीर्घ
,
दीर्घ-दीर्घ प्रत्येक पाँतिमे एक बेर।
२२२१-२२१२-२२
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